Wednesday, January 22, 2020

प्रीमियर बैडमिंटन लीग से भारतीय बैडमिंटन को कितना फ़ायदा?

साल 2013 में पीबीएल यानि प्रीमियर बैडमिंटन लीग का एक मुक़ाबला, जगह थी दिल्ली का सिरीफ़ोर्ट स्टेडियम.

हैदराबाद हॉटशॉट्स की साइना नेहवाल और अवध वॉरियर्स की पीवी सिंधु के बीच होने वाले मैच को देखने के लिए सारी सीटें भरी हुई थीं. वो मैच तो सिंधु हार गईं लेकिन उसी शर्मीली सी सिंधु ने साल 2017 के पीबीएल के तीसरे संस्करण में चेन्नई स्मैशर्स के लिए खेलते हुए साइना नेहवाल को ना सिर्फ़ लीग मैच में वरना सेमीफ़ाइनल में भी हराया और अपनी टीम को चैंपियन भी बनाया.

इससे पहले साल 2016 में पीवी सिंधु रियो ओलंपिक में रजत पदक जीत चुकी थीं. 2017 में ही उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीता. 2017 में ही सिंधु वर्ल्ड सुपर सिरीज़ के फ़ाइनल्स में उपविजेता रहीं. इसके अलावा उन्होंने साल 2017 में ही कोरिया ओपन और इंडिया ओपन जीता.

सिंधु मानती हैं कि इसमें पीबीएल में मिली कामयाबी, अनुभव, ट्रेनिंग, बड़े खिलाड़ियों और शानदार कोचिंग और फ़िटनेस का भी अहम रोल था.

अब एक बार फिर देसी-विदेशी खिलाड़ियों से सजी पीबीएल यानि प्रीमियर बैडमिंटन लीग का छठा संस्करण शुरू हुआ.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में पीवी सिंधु ने कहा, "ये बहुत अच्छी बात है कि इस तरह की लीग हैं. ये हमारे लिए ही नहीं युवा खिलाड़ियों के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद है. उन्हें लोगों को जानने का मौक़ा मिलता है. जो खिलाड़ी सिंधु या साइना बनना चाहती हैं, जो बैडमिंटन में करियर बनाना चाहते हैं. वो हमारा मैच देख सकते हैं. वो देख सकते हैं कि कितनी मेहनत लगती है. खिलाड़ी ही नहीं उनके माता-पिता को भी इस तरह की लीग से फ़ायदा होगा, वो अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे."

भारतीय खिलाड़ी बीसाई प्रणीत ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि एक जूनियर खिलाड़ी के रूप में वह पीबीएल से जुड़े और बेहद अनुभवी खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ खेलने का आत्मविश्वास उनमें आया.

इस बार की लीग में सात टीमें हिस्सा ले रही हैं. इनमें अवध वॉरियर्स, बैंग्लुरू रैपटर्स, चेन्नई सुपर स्टार्स, हैदराबाद हंटर्स, मुंबई रॉकेट्स, नोर्थ इस्टर्न वारियर्स और पुणे 7 एसेस शामिल है.

पीबीएल का पहला आयोजन साल 2013 में हुआ था. इसके बाद साल 2016 में एक बार फिर दुनिया भर के खिलाड़ियों की नीलामी हुई और उसके बाद छह टीमों के साथ लीग को दूसरा जन्म मिला.

तब पी कश्यप ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि इस लीग से यह फ़ायदा हुआ है कि चीन, जापान, थाइलैंड और इंडोनेशिया के खिलाड़ियों के साथ अपने ही घर में खेलने का मौक़ा मिल रहा है. भले ही चीन के बड़े नाम वाले खिलाड़ी नहीं आए लेकिन भविष्य में वह भी आ जाएंगे.

इस बार की लीग में हिस्सा रहे चिराग़ शेट्टी कहते हैं, "मैं तीन साल से लीग में खेल रहा हूँ. पहले ही साल मुझे टॉप खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौक़ा मिला और मैंने बहुत कुछ सीखा. अब मुझे ऐसा लगता है कि मैं किसी के साथ भी खेल सकता हूँ."

पिछले 10 सालों में भारत के कई बैडमिंटन खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है चाहे वो बीसाई प्रणीत, चिराग़ शेट्टी हों, सिंधु या साइना. चिराग़ शेट्टी जैसे खिलाड़ी मानते हैं कि इसकी एक वजह है कि बैडमिंटन को भारत में अच्छे से मैनेज किया गया है और गेम को बहुत अहमियत मिली है.

पीबीएल की बात करें तो साल 2017-18 में छह टीमें थीं. लेकिन साल 2017-18 में दो टीमें बढ़ने से इनकी गिनती आठ हो गई.

साल 2018-19 में पुणे 7 एसेस के जुड़ने के साथ ही पीबीएल में टीमों की संख्या नौ हो गई.

लेकिन इस बार इसके छठे संस्करण में सात टीमें शामिल हैं.

पीबीएल को अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन संघ ने मान्यता देते हुए इसमें दुनिया भर के खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दी है.

Thursday, January 9, 2020

2020 में सस्पेंस, थ्रिलर से लेकर बायोपिक फ़िल्में होंगी पर्दे पर

यूँ तो अमिताभ बच्चन सुर्खियों में रहते ही हैं लेकिन साल 2019 के आख़िर में निर्देशक अनुराग कश्यप के इस ट्वीट से बिग बी कुछ ज़्यादा ही चर्चा में आ गए जहाँ अनुराग ने लिखा था, इस बार फ़र्क़ उन्नीस बीस का नहीं है सर, इस बार फ़र्क़ बहुत बड़ा है, फ़िलहाल आप कृपया अपनी सेहत का ख़याल रखें.अपने हिस्से का आपने 70 के दशक में ही कर दिया था, तबसे अपने अंदर का बच्चन हम अपने अंदर लेकर घूम रहें हैं. इस बार सामने गब्बर हो या LION या फिर शाकाल.... हम भी देखेंगे.

ये उस ट्वीट के जवाब में था जहाँ अमिताभ बच्चन ने लिखा था- नया साल आने में बस कुछ ही दिन बाक़ी हैं. ज़्यादा परेशान होने की बात नहीं, बस 19-20 का ही फ़र्क़ है.

ये दो ट्वीट दिखाते हैं कि बॉक्स ऑफ़िस के उतार-चढ़ाव से इतर 2019 में देश के हालात को लेकर राजनीतिक और वैचारिक खाँचों में बंटा नज़र आया हिंदी सिनेमा. वो लोग जो इस छोर थे या उस छोर और वो जो ख़ामोश रहे.

ख़ैर फ़िल्मों की बात करें तो साल 2019 का अंत अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने से हुआ.

पुरस्कार लेते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा था कि वो उम्मीद करते हैं कि इस अवॉर्ड का मतलब ये नहीं है कि अब उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए. नए साल में उनकी दो बड़ी फ़िल्में आ रही हैं- शूजीत सरकार की फ़ैमिली कॉमेडी 'गुलाबा सिताबो' जो फ़रवरी में आएगी और थ्रिलर फ़िल्म 'चेहरे.'

सिनेमा में तमाम बदलावों के बावजूद आज भी बॉलीवुड में स्टार सिस्टम कायम है और नज़रें बड़े सितारों की फ़िल्मों पर लगी रहती हैं कि ईद किसकी होगी और दीवाली किसकी.

2020 में दीपिका पादुकोण, कंगना रनौत, अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, सलमान ख़ान जैसे बड़े सितारों की फ़िल्में रिलीज़ होनी हैं.

पारंपरिक तौर पर सलामन की फ़िल्में ईद पर रिलीज़ होती हैं. लेकिन इस बार अक्षय कुमार की 'लक्ष्मी बॉम्ब' और सलमान की 'राधे' एक ही दिन मई में ईद पर रिलीज़ होंगी.

लक्ष्मी बॉम्ब में अक्षय पहली बार एक ट्रांसजेंडर का रोल कर रहे हैं और ये तमिल हॉरर कॉमेडी फ़िल्म कंचना ( 2011) की रीमेक है.

अक्षय उन अभिनेताओं में से हैं जो साल में 3-4 फ़िल्में करने के फ़ॉर्मूले पर काम करते हैं. लक्ष्मी बॉम्ब से पहले मार्च में उनकी एक्शन फ़िल्म सूर्यवंशी आएगी जो फ़िल्म सिंबा को आगे बढ़ाएगी- और कैमिओ में दिखेंगे सिंघम अजय देवगन और सिंबा रणवीर सिंह.

पिछले कुछ समय से बायोपिक बनाने का सिलसिला चल पड़ा है. 2020 में भी ऐसी कई फ़िल्में कतार में हैं.

ऐतिहासिक किरादरों पर फ़िल्में बनाने का क्रम जारी है- जैसे जनवरी में आने वाली तानाजी. छत्रपति शिवाजी के योद्धा रहे तानाजी का किरदार अजय देवगन ने निभाया है जो राजपूत कमांडर उदयभान (सैफ़ अली) से सिंहगढ़ का क़िला जीतते हैं.

साल के आख़िर में दो और बायोपिक फ़िल्में आएगीं- पृथ्वीराज चौहान पर बनी ऐतिहासिक फ़िल्म पृथ्वीराज. यशराज की इस फ़िल्म में होंगे अक्षय कुमार और मिस वर्ल्ड रह चुकीं मानुषी छिल्लर.

शूजीत सरकार सरदार उधम सिंह नाम की बायोपिक अक्तूबर में लेकर आ रहे हैं विकी कौशल के साथ. उधम सिंह को अंग्रेज़ों ने 31 जुलाई, 1940 को फांसी पर चढ़ा दिया था. वैसे 1999 में पंजाबी में उधम सिंह पर फ़िल्म बनी थी जिसमें राज बब्बर, गुरदास मान और जूही चावला ने काम किया था.

भारतीय वायु सेना की महिला पायलट गुंजन सक्सेना की कहानी भी 2020 में फ़िल्मी पर्दे पर देखने को मिलेगी और रोल करेंगी जान्हवी कपूर जो धड़क के बाद अभी नज़र नहीं आई हैं.

वहीं 1971 की भारत-पाक जंग की एक अनोखी घटना पर बन रही है, भुज- द प्राइड ऑफ़ इंडिया.

स्क्वॉड्रन लीडर विजय कार्निक ने तब जंग में तबाह हुए एयरफ़ोर्स बेस को स्थानीय औरतों की मदद से दोबारा बनाया था. ये अपने तरह का अनोखा अभियाना था. फ़िल्म में दिखेंगे अजय देवगन और सोनाक्षी सिन्हा.

2020 में टोक्यो ओलंपिक होना है, इसे इत्तेफ़ाक कहें या कुछ और कि इस साल स्पोर्टस पर कई फ़िल्मों पर काम चल रहा है.

जनवरी में ही दर्शकों से पंगा लेंगी कंनता रनौत जो फ़िल्म में एक ऐसी कबड्डी चैंपियन का रोल कर रही हैं जिसे दुनिया भुला चुकी है और वो घर गृहस्थी में कहीं खो सी गई. माँ बनने और 30 पार होने के बाद क्या वो वापसी कर पाएगी ? ये भारत में कई महिला खिलाड़ियों की भी असल कहानी है.

खेलों पर बनी फ़िल्मों में सबसे चर्चित है कबीर खान और रणवीर सिंह की फ़िल्म 83 जो भारतीय क्रिकेट टीम की 1983 की ऐतिहासिक जीत पर बनी है. 2019 में गली बॉय का रैपर मुराद यानी रणवीर 2020 में क्रिकेटर कपिल देव बनेगा.

भारतीय खेलों के एक और नायक सईद अब्दुल रहीम पर बन रही है फ़िल्म मैदान. फ़ुटबॉल कोच अब्दुल रहीम को आधुनिक भारतीय फ़ुटबॉल का आर्टिकेटक माना जाता है. लेकिन अब कम ही लोग उनके बारे में जानते हैं. ये रोल करेंगे अजय देवगन.